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१. २. २०२१

इस सप्ताह-

अनुभूति में- वसंत पंचमी पतंगों का पर्व भी है। इस अवसर पर प्रस्तुत हैं विविध विधाओं में अनेक रचनाकारों की ढेर-सी पतंग रचनाएँ

- घर परिवार में

रसोईघर में- वसंत उत्सव की तैयारी में हमारी रसोई-संपादक शुचि लाई हैं सरस्वती पूजा के प्रसाद के लिये- ज़ाफरानी पुलाव

सौंदर्य सुझाव - १० लीटर पानी में दो बड़े चम्मच गुलाबजल मिलाकर नहाने से त्वचा स्वस्थ और सुंदर बनती है।

संस्कृति की पाठशाला- वसंत पंचमी के दिन पूजी जाने वाली देवी सरस्वती को विद्या और ललित कलाओं की देवी माना जाता है।

क्या आप जानते हैं? संगीत में एक विशेष राग वसंत ऋतु के नाम पर बनाया गया है जिसे राग बसंत कहते हैं।

- रचना व मनोरंजन में

गौरवशाली भारतीय- क्या आप जानते हैं कि फरवरी के माह में कितने गौरवशाली भारतीय नागरिकों ने जन्म लिया? ...विस्तार से

सप्ताह का विचार- वसंत अपने आप नहीं आता, उसे लाना पड़ता है। सहज आने वाला तो पतझड़ होता है, वसंत नहीं। -हरिशंकर परसाई

वर्ग पहेली-३३४
गोपालकृष्ण-भट्ट-आकुल और रश्मि-आशीष
के सहयोग से


 

हास परिहास में
पाठकों द्वारा भेजे गए चुटकुले

साहित्य एवं संस्कृति में- वसंत के अवसर पर

समकालीन कहानियों में संयुक्त अरब इमारात से
स्वाती भालोटिया की कहानी- क्या लौटेगा वसंत

नदी किनारे, घास पर पग सहलाता, बौद्ध मंदिर को स्वयं में समाए टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों पर डोलता-सा रायन, अपने स्वच्छंद चेहरे पर धूप का ताप लिए, मेरी ओर ही चला आ रहा था। अपने गेरुए चोंगे में, सर मुँडाए, रायन मुझे सदा से किसी ऐतिहासिक बौद्ध भिक्षु की भाँति ही लगता है जो किसी ईश्वरीय माया से, धुंध उड़ाती दार्जिलिंग की पर्वत-शृंखलाओं के बीच, अनायास ही प्रकट हो गया हो। जब भी मैं ग्रीष्मावकाश में अपने वार्षिक भ्रमण के लिए दार्जिलिंग आती, रायन मुझसे यों ही रोज़ मिलने आता, पास बैठा-बैठा बातें करता, निहारता और लजायी-सी हताशा फैला जाता। इस बार भी पिता द्वारा सहेजकर बनवाई गई, बरसों पुरानी ईटों से बने श्वेत घर का पल्लवित आकर्षण कलकत्ता शहर के कोलाहल से दूर मुझे इस हरित भूमि में खींच ही लाया। प्रवेश द्वार पर पत्थर की सीढ़ियों के किनारे, गेरू पुते गमलों पर खिले, केसरी फूल, जीवन के किसी भी पड़ाव पर, मन को सुवासित करने में आज भी चूके नहीं हैं। आगे पढ़ें...

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ज्ञान चतुर्वेदी का व्यंग्य
रामबाबू जी का वसंत

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महेश परिमल का ललित निबंध
वसंत कहाँ हो तुम
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पूर्णिमा वर्मन का आलेख
मनबहलाव वसंत के

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पुनर्पाठ में महेन्द्र सिंह रंधावा के साथ
ऋतुओं की झाँकी (वसंत
)
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पुराने अंकों से-

कहानियों में-

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एक करगिल और- संतोष श्रीवास्तव

लघुकथाओं में-

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वसंतोत्सव- राकेश कुमार सिंह

प्रकृति और पर्यावरण में-

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वसंत का फल काफल- ज्योतिर्मयी पंत

व्यंग्य में—

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चल वसंत घर आपणे- अशोक गीते

संस्मरण में-

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हवा में वसंत- निर्मल वर्मा

निबंध में—

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मादक छंद वसंत के- श्यामनारायण वर्मा

ललित निबंध में-

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लेकिन मुझको फागुन चाहिए दामोदर पांडेय

दृष्टिकोण में—

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सूफी दरगाहों में वसंत पंचमी- प्रदीप शर्मा

पर्व परिचय में-

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वसंत पंचमी- साधना का संकल्प लेने का दिन- रमेश चंद

लोकरंग में-

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लोकगीतों में झाँकता वसंत- सुरेशचंद्र शर्मा

रसोईघर में-

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वसंत माधुरी

 

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"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है
यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को प्रकाशित होती है।


प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन, कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन

 
सहयोग : कल्पना रामानी -|- मीनाक्षी धन्वंतरि
 

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