पुराने अंक तिथि-अनुसार   //   पुराने अंक विषयानुसार 
फेसबुक पर   // तुक कोश // शब्दकोश // लेखकों से


१. ७. २०२४ 

   

साहित्य और संस्कृति में-         

समकालीन कहानियों में
इस माह प्रस्तुत है- आस्ट्रेलिया से रेखा राजवंशी
की कहानी
गर्मा-गरम पकौड़े

सिंग मी टु स्लीप, द बुलेट्स फॉल
लेट मी फारगेट द वार एंड आल
डैम्प इज माई डगआउट कोल्ड इज माई फीट
नथिंग बट बिस्कुट एंड बुली टु ईट
गोलियाँ चल रही हैं, मुझे सुला दो
मुझे युद्ध और सब कुछ भूल जाने दो
मेरी खाई में नमी है, और मेरे पैर ठंडे हैं
खाने के लिए कुछ नहीं, बिस्कुट और बुली (बीफ) के सिवा।
लगभग १९१८ में, आर्ची ए. बारविक ने पहले विश्व युद्ध के दौरान अपनी डायरी में जब यह लोकप्रिय सैनिक का गीत लिखा था, गलीपोली की विषम परिस्थितियों में इतने महीनों से लड़ते-लड़ते हज़ारा सिंह और उनके साथी थक चुके थे। आज भारतीय भोजन की बहुत याद आ रही थी। हज़ारा सिंह को फ्रंट पर अक्सर याद आती हैं बीजी और उनसे ज़्यादा याद आते हैं उनके हाथ के बनाए हुए गर्मागर्म पकौड़े, लस्सी के बड़े से गिलास के साथ प्लेट भर प्याज और आलू के पकौड़े। जब भी इस बारे में सोचते तो घंटों उनकी जबान पर स्वाद बना रहता।   ...आगे-

***

मुक्ता पाठक की लघुकथा
प्याज के पकौड़ों का जादू
***

संस्कृति के अंतर्गत-
पूर्णिमा वर्मन का आलेख- पकौड़ों की समृद्ध परंपरा

***

राकेश श्रीवास्तव कंदर्प का
ललित निबंध- बरसात में भजिया

***

पुनर्पाठ में- दिनेश कुमार सिंह
का संस्मरण- गरमा-गरम पकौड़े और चाय

***

अनुभूति-में-
गरम पकौड़े विशेषांक के अंतर्गत विविध विधाओं में अनेक रचनाकारों की कुरकुरी रचनाएँ।

स्थायी स्तंभों में-

गृह सज्जा में- बालकनी, जिसे हम छज्जा कहते हैं भारतीय शैली में सजा हो तो परंपरा का घना सौंदर्य देखते ही बनता है। इस अंक में- सुगंध के लिये मोमबत्तियाँ

रसोईघर में- हमारी रसोई संपादक शुचि अग्रवाल ने अभिव्यक्ति के पकौड़े विशेषांक के लिये तैयार किये हैं-
तरह-तरह के कवाब और पकौड़े

बागबानी में- पानी में सुगमता से बढ़ने वाले बारह पौधों की शृंखला में प्रस्तुत है- हेडेरा हेलिक्स या इंग्लिश आईवी

स्वाद और स्वास्थ्य में- शाकाहारी भोजन में प्रोटीन के लिये महत्वपूर्ण बारह दालें जो अंतरराष्ट्रीय रूप से लोकप्रिय हैं। इस अंक में प्रस्तुत है- काला चना

बतरस से लिखवट तक - रतन मूलचंदानी के फोटो निबंध अलबेले फूलों की शृंखला में इस माह प्रस्तुत है- नये पत्ते गुलाबी रंग

गौरवशाली भारतीय- क्या आप जानते हैं कि जुलाई महीने में कितने गौरवशाली भारतीय नागरिकों ने जन्म लिया? ...विस्तार से

नवगीत संग्रहों और संकलनों से परिचय की शृंखला में- शांति सुमन के नवगीत संग्रह धूप रंगे दिन का परिचय पद्मा मिश्रा की कलम से

वर्ग पहेली-३७५
गोपालकृष्ण-भट्ट-आकुल और
रश्मि आशीष के सहयोग से

हास परिहास
में पाठकों द्वारा भेजे गए चुटकुले

आज सिरहानेउपन्यास उपहार कहानियाँ कला दीर्घा कविताएँ गौरवगाथा पुराने अंक नगरनामा रचना प्रसंग
घर–परिवार नाटक परिक्रमा पर्व–परिचय प्रकृति पर्यटन प्रेरक प्रसंग प्रौद्योगिकी फुलवारी रसोई विज्ञान वार्ता
कलम गही नहिं हाथ दो पलबतरस से लिखवट विशेषांक हिंदी लिंक साहित्य संगम संस्मरणचुटकुले
डाक-टिकट संग्रहअंतरजाल पर लेखन साहित्य समाचार साहित्यिक निबंध स्वास्थ्य हास्य व्यंग्यडाउनलोड परिसर

© सर्वाधिकार सुरक्षित
"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह के पहले सप्ताह मे प्रकाशित होती है।

प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन, कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
-|-
सहयोग : रतन मूलचंदानी
 पता-

Google
Search WWW Search www.abhivyakti-hindi.org