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समकालीन कहानियों में
इस माह
प्रस्तुत है- आस्ट्रेलिया से रेखा
राजवंशी की
कहानी
गर्मा-गरम पकौड़े
सिंग
मी टु स्लीप, द बुलेट्स फॉल
लेट मी फारगेट द वार एंड आल
डैम्प इज माई डगआउट कोल्ड इज माई फीट
नथिंग बट बिस्कुट एंड बुली टु ईट
गोलियाँ चल रही हैं, मुझे सुला दो
मुझे युद्ध और सब कुछ भूल जाने दो
मेरी खाई में नमी है, और मेरे पैर ठंडे हैं
खाने के लिए कुछ नहीं, बिस्कुट और बुली (बीफ) के सिवा।
लगभग १९१८ में, आर्ची ए. बारविक ने पहले विश्व युद्ध के दौरान
अपनी डायरी में जब यह लोकप्रिय सैनिक का गीत लिखा था, गलीपोली
की विषम परिस्थितियों में इतने महीनों से लड़ते-लड़ते हज़ारा सिंह
और उनके साथी थक चुके थे। आज भारतीय भोजन की बहुत याद आ रही
थी। हज़ारा सिंह को फ्रंट पर अक्सर याद आती हैं बीजी और उनसे
ज़्यादा याद आते हैं उनके हाथ के बनाए हुए गर्मागर्म पकौड़े,
लस्सी के बड़े से गिलास के साथ प्लेट भर प्याज और आलू के पकौड़े।
जब भी इस बारे में सोचते तो घंटों उनकी जबान पर स्वाद बना
रहता।
...आगे-
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