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१. ५. २०२६ 

     

साहित्य और संस्कृति में-         

समकालीन कहानियों में
इस माह प्रस्तुत है सुशील कुमार शर्मा
की कहानी
धूप प्यास और वैदिक जलजीरा

जेठ की सुबहें दरअसल सुबह नहीं होतीं, वे रात की शेष बची हुई थकान का विस्तार होती हैं। सूरज उगते ही नहीं, जैसे आकाश पर अधिकार कर लेते हैं। उस दिन भी ऐसा ही था। क्षितिज पर लालिमा की एक पतली रेखा उभरी ही थी कि उसकी तपिश ने हवा को बदलना शुरू कर दिया।
गाडरवारा शहर के उस पुराने घर का आँगन अभी-अभी धोया गया था। मिट्टी में पानी के छींटे पड़ते ही जो सोंधी गंध उठती है, वह किसी भी इत्र से अधिक गहरी होती है। तुलसी चौरे के पास धूपबत्ती जल रही थी और भीतर रसोई में जीवन अपनी सबसे सच्ची लय में चल रहा था।
दादी चौकी पर बैठी थीं। सामने कच्चे आमों का ढेर—हरे, ताजे, भीतर खटास का पूरा संसार समेटे हुए। पास ही पुदीने की पत्तियां, भुना हुआ जीरा, काला नमक, हींग की डिबिया, सब जैसे किसी अनुष्ठान की तैयारी में हों।  ...आगे-

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मुक्ता पाठक की लघुकथा
एक गिलास ठंडक
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शुचि अग्रवाल का संस्मरण
अंधड़ की अमिया

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महेन्द्र तिवारी का ललित निबंध
तपती दोपहर और पने की तरावट
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पूर्णिमा वर्मन का आलेख
जलजीरा स्वाद, स्मृति और साहित्
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अनुभूति में-- जलजीरा विशेषांक के अंतर्गत विविध विधाओं मे रची अनेक रचनाकारों की सरस रचनाएँ।

स्थायी स्तंभों में-

गृह सज्जा में- बालकनी, जिसे हम छज्जा कहते हैं भारतीय शैली में सजा हो परंपरा का घना सौंदर्य देखते ही बनता है। इस अंक में- छतरी या छाया समाधान

रसोईघर में- हमारी रसोई संपादक शुचि अग्रवाल रामनवमी के अवसर पर इस अंक में प्रस्तुत कर रही हैं- विशेषांक के अनुरूप झटपट जलजीरा

बागबानी में- छोटी पत्तियों वाले वे बारह पौधे जो आपके घर को सजा देंगे। इस अंक में प्रस्तुत है- कैलीसिया रेपेंस

स्वास्थ्य के अंतर्गत- अच्छी नींद के बारह उपाय जो शरीर के सर्वश्रेष्ठ विश्राम दे और थकान से पूरी मुक्ति। इस अंक में प्रस्तुत है- रात में मसालेदार भोजन बंद

बतरस से लिखवट तक - रतन मूलचंदानी के फोटो निबंध पत्थरों की दुनिया के- इस अंक में प्रस्तुत है- मेरीवेदर बॉथ से बरबुड बीच

गौरवशाली भारतीय- क्या आप जानते हैं कि मई महीने में कितने गौरवशाली भारतीय नागरिकों ने जन्म लिया? ...विस्तार से

नवगीत संग्रहों और संकलनों से परिचय की शृंखला में- राजपाल सिंह गुलिया के नवगीत संग्रह चंदन वन का परिचय उदय शंकर सिंह उदय की कलम से।

वर्ग पहेली-३९७
गोपालकृष्ण-भट्ट-आकुल और
रश्मि आशीष के सहयोग से

हास परिहास
में पाठकों द्वारा भेजे गए चुटकुले

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 पता-

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