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जल में जीवन
पानी मे भी सुगमता से
बढ़ने वाले पौधे जो
घर का रूप सँवारें और
पर्यावरण भी निखारें
(संकलित)
५- मान्सटेरा
स्विस चीज़ प्लांट के नाम से भी जाना जाने वाला मॉन्स्टेरा
हाइड्रोपोनिक पौधे के रूप में बेहद खूबसूरत है। सच पूछो तो
यह पानी में विकसित होने वाले पौधों का सुपर-स्टार है। घर
के लिये अत्यंत उपयुक्त और लोकप्रिय यह पौधा अनोखे पत्तों
के लिये लोकप्रिय है, परिपक्व होने पर इसकी पत्तियों में
छेद और दरारें पड़ जाती हैं। इसका प्रसार आमतौर पर तने की
कटिंग द्वारा किया जाता है और तेज लेकिन अप्रत्यक्ष प्रकाश
में सफलता से उगाया जा सकता है। पानी में उगने पर यह एक
अद्भुत प्रभाव छोड़ता है। पारदर्शी काँच के जार में इसकी
मोटी, सफेद जड़ें बहुत ही सुंदर और कलात्मक लगती हैं।
पौधे को पानी में लगाते समय इसके उचित विकास के लिये कम से
कम एक स्वस्थ पत्ती और एक जड़वाली गाँठ (नोड) के साथ तने
का एक हिस्सा निकालें। कटे हुए सिरे को तब तक पानी में
रखें जब तक जड़ें विकसित न हो जाएँ, इसमें कई महीने लग
सकते हैं। बिना नोड के पत्ती पानी में केवल कुछ दिन जीवित
रहेगी, लेकिन उसमें जड़ें नहीं आएँगी। जब हम किसी भी पौधे
को पानी में उगाते हैं तो बैक्टीरिया और तने की सड़न को
रोकने के लिए हर हफ्ते पानी बदलें, पानी की उचित गुणवत्ता
का ध्यान रखें और पौधे के बढ़ने के साथ-साथ उसे संरचनात्मक
सहारा भी दें।
मान्स्टेरा उत्तर भारत के घरों के लिए यह एक शानदार विकल्प
है। अगर सीधी धूप से दूर रखा जाय तो इसे उत्तर भारत की
गर्मी काफी पसंद है। पानी में उगने के कारण इसमें मिट्टी
की गंदगी नहीं होती, जो इसे ड्राइंग रूम या बेडरूम के लिए
उपयुक्त बनाती है। मॉन्स्टेरा की पत्तियाँ और जड़ें भारी
होती हैं, इसलिए एक मज़बूत और चौड़े मुँह वाला काँच का जार
या फूलदान इस्तेमाल करें ताकि वह पलट न जाए। फूलदान को
गिरने से बचाने के लिये उसकी तली को भारी बनाना चाहिये।
इसके लिये तली में कुछ सुंदर पत्थर डाले जा सकते हैं। हर
सात से दस दिनों में पानी बदलते रहें ताकि जार में काई न
जमे और ऑक्सीजन बनी रहे। उत्तर भारत की कड़ाके की ठंड में
इसे खिड़की के एकदम पास न रखें, क्योंकि काँच बहुत ठंडा हो
जाता है जिससे पौधे को नुकसान पहुँच सकता है।
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