जब मैंने फूलों के हारों में
पन्नी के चाँद, सितारे और पुदीने के पत्ते गूँथने शुरू किए तो
सारे शहर के लोग हमारी दुकान पर आने लगे। फिर सेठ जी ने मेरा
वेतन दो सौ रुपए से बढ़ा कर तीन सौ रुपए कर दिया, ताकि कोई
दूसरा फूल बेचने वाला मुझे बहका कर न ले जाए। आज तो हमारी
दुकान पर फूल ख़रीदने वालों की भीड़ बढ़ती ही जा रही था जैसे
शहर के हर आदमी को आज फूलों की ज़रूरत पड़ गई थी।
''सौगंधी महाराज! नमस्कार। एक शानदार फूलों का हार चाहिए हमें
- दस-दस के नोट भी पिरोना उसमें और गुलाब के फूल भी।''
''अभी लो शर्मा साहब। अरे राजू बेटा, झटपट साहब का ऑर्डर लो और
इनका काम तमाम करो।''
''ऐसा लगता है मक्खन लाल जी इलैक्शन जीत गए हैं जब ही आप
रुपयों के हार बनवा रहे हैं आज?'' सौगंधी लाल मुँह खोल कर
हँसने लगे।
''सौगंधी लाला, कैसे न जीतते मक्खन लाल जी! हम जा उन के साथ
थे। दो हज़ार आदमियों को माधोपुर से ले गए थे लारियों में भर
के, सब से वोट डलवा दिए।'' सौगंधी लाल के साथ शर्मा जी भी ज़ोर
से हँस पड़े।
''मगर एक लड़का कह रहा था, पुलिस ने फाइरिंग कर दी माधोपुर में
बहुत लोग मारे गए हैं।'' मैंने एक बड़ा-सा गुलाब हार के बीच
में टाँकते हुए पूछा।
''इलेक्शन में तो यह सब चलता ही रहता है जी। दूसरी पार्टी वाले
पुलिस को ले आए। फाइरिंग हो गई, मगर जीत तो हमारी हुई ना।''
शर्मा जी जीत के नशे में थिरक रहे थे। एक नौजवान लड़का ऑटो
रिक्शा से उतरा और दौड़ता हुआ दुकान की तरफ़ आया।
''ज़रा सुनिए सेठ साहब! आपके यहाँ इतने फूल मिल जाएँगे कि
चालीस अर्थियों पर डाले जा सकें।''
चालीस अर्थियाँ! सूई अब की बार
मेरे दिल में चुभ गई। शर्मा जी नौजवान को देख कर घबरा गए, पीछे
को हटे फिर हिम्मत करके बोले, ''हैलो जॉन! हाउ आर यू?''
उन्होंने हाथ आगे बढ़ाया।
''फाइन!'' नौजवान ने शर्मा जी का हाथ झटक दिया।
''इतनी अर्थियाँ, एक साथ! कहाँ से आ रहे हो नौजवान?'' सौगंधी
लाल ने घबरा कर पूछा।
''माधोपुर से, इलैक्शन में सालों का बस न चला तो सारे गाँव से
नौजवानों को बहला-फुसला कर ले गए बोगस वोटिंग के लिए, पुलिस ने
गोली चला दी।''
''अब तुम माधोपुर से आए हो फूल लेने?'' एक ग्राहक ने बड़े दुख
के साथ पूछा।
''क्या करें हमारे गाँव के सारे फूल तो लोग ले गए हैं मक्खन
लाल जी को पहनाने के लिए।''
''तो क्या इन अर्थियों का जुलूस शहर में निकाला जाएगा?'' शर्मा
जी ने जॉन से पूछा।
''जी हाँ, हम सारे शहर में जुलूस ले जाएँगे। मक्खन लाल के
खिलाफ़ नारे लगवाएँगे। माधोपुर में दोबारा इलैक्शन होगा।''
''अच्छा, तो सौगंधी लाल! एक फूलों का शानदार घेरा भी बना दो।
मक्खन लाल जी भी इन शहीदों को श्रद्धांजलि देने ज़रूर
जाएँगे।'' शर्मा जी ने पर्स से और नोट निकाल कर गिनते हुए कहा।
''अभी लो जी, अभी लो। अरे राजी बेटे, शर्मा जी का ऑर्डर ले
फटाफट और इनका काम तमाम कर।'' आज मैंने आधे दिन की छुट्टी ले
कर अपने दोस्त के साथ पिक्चर देखने का प्रोग्राम बनाया था मगर
आज हमारी दुकान पर आने वाले ग्राहकों की भीड़ बढ़ती ही जा रही
थी।
''ज़रा आप इधर हटिए, आप इधर जाइए।'' एक नौजवान स्कूटर रोक कर
सबको हटाता हुआ आगे बढ़ा, किसी तेज़ खुशबू वाले परफ्यूम में
डूबा हुआ।
''बालों में सजाने के लिए एक बहुत खूबसूरत गजरा चाहिए। मगर फूल
ताज़ा हों खुशबू वाले।''
''अभी लीजिए बाबू साहब।'' सौगंधी लाल ने बड़े ध्यान से बाबू
साहब को देखा।
''राजू बेटा, ऐसी फूलों की वेणी बना कर लाओ बाबू साहब के लिए
कि इन का काम तमाम हो जाए।''
''बाबू साहब भरोसा रखिए हमारी दुकान पर हर चीज़ अच्छी मिलेगी
आपको। ऐसा गजरा बना कर दूँगा कि आपकी मिसेज खुश हो जाएँगी।'' |