पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार हिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP            पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org


साहित्य संगम

साहित्य संगम के इस अंक में प्रस्तुत है जीलानी बानो की उर्दू कहानी का हिंदी रूपांतर बात फूलों की रूपांतरकार हैं शाहीना तबस्सुम।

''दियासलाई जब चिराग़ रोशन कर देती है तो उसे फेंक देते हैं.।''
''फूल महल'' की गद्दी पर बैठे सौगंधी लाल मुझे अपने तजुर्बे की बातें सिखाते रहते हैं।
''अपनी बातों में, फूलों के हारों में इतने चुटकुले लतीफ़े टाँकते जाओ कि साला ग्राहक इस में उलझता ही चला जाए और फिर हार के मुँहमाँगे दाम वसूल कर लो।'' वह बड़ी ज़ोर से हँसते, इस उम्मीद के साथ कि मैं भी उन का साथ दूँगा, मगर उनकी बातों में उलझ कर सूई मेरी उँगली में चुभ जाती है।

सौगंधी लाल अपनी गद्दी पर बैठे दिन भर नोट गिन-गिन कर रसीदें काटते रहते हैं। हर ग्राहक से ऐसे बात करते हैं जैसे जन्म-जन्म का नाता हो। दिन भर ग्राहकों का जमघट, नई-नई फ़रमाइशें और सौगंधी लाल की डाँट ''राजू, राजी, अबे राजू!''
''फूल महल'' के साइन बोर्ड को हमने रंगबिरंगी रोशनी से ऐसा सजाया है कि दूर से देख कर ग्राहक खिंचा चला आए। तरह-तरह के बूटे, झिलमिलाते हार, फूलों के साथ लिपटे हुए काँटों से मेरे हाथ लहूलुहान हो जाते हैं, मगर मुझे यह काम अच्छा लगता है। भाग-दौड़ कुछ नहीं आराम से बैठे फूलों के हार गूँथे जाओ और सौगंधी लाल के साथ-साथ हँसना सीख लो नहीं तो वह नाराज़ हो जाते हैं।

पृष्ठ  . . .

आगे--

इस रचना पर अपनी प्रतिक्रिया लिखें - दूसरों की प्रतिक्रिया पढ़ें

Click here to send this site to a friend!

पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार हिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP / पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org

© सर्वाधिका सुरक्षित
"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक
सोमवार को परिवर्धित होती है।