पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार हिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP / पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org


कहानियाँ

समकालीन हिंदी कहानियों के स्तंभ में इस सप्ताह प्रस्तुत है
यू.के. से कादंबरी मेहरा की कहानी— धर्मपरायण


संगीता कितनी शिथिल पड़ गई है।
मद्रास से दिल्ली तक की यह उड़ान केवल एक घंटे की थी। मगर वह उठी तो ऐसे जैसे घुटने बरसों से मुड़े हुए हों। जहाज़ की बिचली गली में, उसके अलावा सबको पहले उतरने की जल्दी थी। आखिर एक भारतीय सेना का अफ़सर था जिसने उसे आगे चलने का पास दिया वरना वहीं अटकी खड़ी रहती, बिना चेष्टा किए। फिर एक तरफ़ की रेलिंग पर दोनों हाथ टेक कर वह धीरे-धीरे एक-एक सीढ़ी नीचे उतरी।

रीटा को विश्वास नहीं हुआ कि यह वही संगीता है जो अभी केवल पाँच वर्ष पहले तक नौकरी और गृहस्थी दोनों निबाहती रही है। दिल्ली में पूरे समय के नौकर अब मिलते ही कहाँ हैं। एक बर्तन सफ़ाई वाली लगा रखी थी। शायद अवकाश ले लेने के बाद मानसिकता बदल जाती हो। बेटी की शादी हो गई है। बेटा बाहर चला गया। कोई ज़िम्मेदारी ख़ास बची नहीं है। मन में मान बैठी है कि आराम करने की उसकी उम्र है अब। इससे तो नौकरी ही भली थी। बेकार जल्दी छोड़ दी।

ऊँह! रीटा को क्या! चलने दो इसे अपनी रफ्तार पर! इसके कारण वह क्यों थम जाए? इसीलिए जहाज़ पर से उतरने में उसने अपेक्षाकृत अधिक तत्परता दिखाई। पुष्पक की यह एक यादगार उड़ान थी।

पृष्ठ :  . . .

आगे-

इस रचना पर अपनी प्रतिक्रिया लिखें - दूसरों की प्रतिक्रिया पढ़ें

Click here to send this site to a friend!

पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार हिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP / पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org

© सर्वाधिका सुरक्षित
"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक
सोमवार को परिवर्धित होती है।