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समकालीन कहानियों में
इस माह
प्रस्तुत है आस्ट्रेलिया से राजीव थिंद की
कहानी
नेपाल से युद्ध और शांति

“हटो ज़रा! मुझे झाड़ू लगानी है,” हमारे घर काम करने वाली सोलह
साल की नेपाली लड़की, पूनम ने आदेश दिया।
मैं 'सुपर मारियो ब्रदर्स' वीडियो गेम में पूरी तरह डूबा हुआ
था—१९८८ के जालंधर का हाई-टेक मनोरंजन।
“तंग मत करो, पेंचो,” मैंने आठ साल के बच्चे की पूरी तुनक के
साथ पंजाबी में उसे गाली दी। “मैं अपना फ़र्श ख़ुद साफ़ कर
लूँगा!”
मेरी गाली पूनम के लिए मुझे मुसीबत में डालने का सुनहरा मौक़ा
थी।
“आंटी! इधर आइए। राजू मुझे काम नहीं करने दे रहा, और उसने बहुत
गंदी गाली दी है।”
माँ रसोई से निकलीं, मुझे ज़ोर का थप्पड़ मारा, और फिर वापस
खाना बनाने चली गईं। मेरी आँखों में आँसू छलक आए
और पूनम के चेहरे पर विजयी मुस्कान...आगे-
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