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१. ८. २०२६ 

     

जन्माष्टमी विशेषांक में-         

समकालीन कहानियों में
इस माह प्रस्तुत है मनीष मनहास
की कहानी
वृंदावन

कालियादेह की वह दोपहरी मुझे आज भी याद है। दो पंछियों से वे किसी डाल-डाल पात-पात पर डोल रहे थे। यों लग रहा था मानो राधा-कृष्ण ही हों। वह उसे कह रहा था कि यह कालियादेह है, वृन्दावन का वह पावन स्थल जहाँ आज से ५००० वर्ष पूर्व वासुदेव श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का वध किया था। और यह है ५००० वर्ष पुराना कदंब का वृक्ष, जिस पर चढ़कर उन्होंने यमुना में छलांग लगाई थी और जिस दिव्य वृक्ष पर आज भी शोभायमान हैं उनके पद-चिह्न। "देखो तो, देखो ज़रा, ज्यों का त्यों मिलता है वह तने के रूप में ढला हुआ कलश, जिसमें गरुड़ देव के अमृत उड़ेलने के पश्चात् यह वृक्ष कभी मुरझाया नहीं, आज भी हरा-भरा है।"   
वह लड़का उस लड़की को कालियादेह के बारे में ये सब बातें बता रहा था। और मैं सोच रही थी कि यह वृक्ष नहीं अपितु साक्षात् श्रीकृष्ण हैं। ...आगे-

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निविदिता श्रीवास्तव निवि
की लघुकथा- आत्मबोध
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पदश्री डॉ रवीन्द्र कुमार का आलेख
श्रीमदभगवद्गीता सैन्य नेतृत्व और लोकाचार
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श्रीराम पुकार शर्मा का
ललित निबंध- श्रीकृष्ण जन्म
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पुनर्पाठ में
शिववचन चौबे का आलेख- राम वही हैं कृष्ण वही

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अनुभूति में--
मुकरी विशेषांक के अंतर्गत
अनेक रचनाकारों की मनभावन मुकरियाँ।

स्थायी स्तंभों में-

गृह सज्जा में- बालकनी, जिसे हम छज्जा कहते हैं भारतीय शैली में सजा हो परंपरा का घना सौंदर्य देखते ही बनता है। इस अंक में- परत-दर-परत सजावट का आकर्षण

रसोईघर में- हमारी रसोई संपादक शुचि अग्रवाल जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में इस अंक में विशेष रूप से प्रस्तुत कर रही हैं- केसरिया श्रीखंड।

बागबानी में- छोटी पत्तियों वाले वे बारह पौधे जो आपके घर को सजा देंगे। इस अंक में प्रस्तुत है- पर्पल हार्ट

स्वास्थ्य के अंतर्गत- अच्छी नींद के बारह उपाय जो शरीर के सर्वश्रेष्ठ विश्राम दे और थकान से पूरी मुक्ति। इस अंक में प्रस्तुत है- सोने से पहले स्नान।

बतरस से लिखवट तक - रतन मूलचंदानी के फोटो निबंध पत्थरों की दुनिया के- इस अंक में प्रस्तुत है- पौधे की शान और अकड़

गौरवशाली भारतीय- क्या आप जानते हैं कि अगस्त के महीने में कितने गौरवशाली भारतीय नागरिकों ने जन्म लिया? ...विस्तार से

नवगीत संग्रहों और संकलनों से परिचय की शृंखला में- डॉ. अशोक अज्ञानी के नवगीत संग्रह लौट आओ फिर परिंदों का परिचय पूर्णिमा वर्मन की कलम से।

वर्ग पहेली-४००
गोपालकृष्ण-भट्ट-आकुल और
रश्मि आशीष के सहयोग से

हास परिहास
में पाठकों द्वारा भेजे गए चुटकुले

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन, कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
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सहयोग : रतन मूलचंदानी
 पता-

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