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१. ३. २०२६ 

     

साहित्य और संस्कृति में-         

गौरव गाथा में
इस माह प्रस्तुत है
अमृतलाल नागर की कहानी
लखनवी होली

इसमें न तो मेरा ही दोष मानिएगा और न यश। कारण यह है कि 'नव-जीवन' सम्पादक ने होली के दिन सवेरे ही अचानक टेलीफोन से मुझे अपने घर पर बुलाकर बड़े नाटकीय ढँग से डबल गहरी केसरिया भंग पिला दी और जब पहला झन्नाटा आया तो बोले कि पंडित जी, गुसाई जी ने आपा‌काल में चार को परखने के लिए कहा है। आज आपकी मित्रता कसौटी पर है। होली के कारण हमारे रिपोर्टर आज अचानक गायब हो गए हैं। होली के दिन युवकों को कोई क्या कह सकता है और अखबार का काम, आप जानते हैं कि रुक नहीं सकता। इस संकट से आप ही आज हमें उबारिए। मैं सरदार अहमद का ठेला आपको दिलवाए देता हूँ। ड्राइवर के पास पर्याप्त धन रहेगा, वह बराबर पान-मिष्ठान्न, दूध-मलाई, इत्र-फुलेल, फूल आदि से आपका चित्त प्रफुल्लित रखेगा।...आगे-
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क्षमा शिशोदिया की लघुकथा
फाग का रंग चोखा  
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डॉ. अनिता कपूर, विनीता तिवारी और पूजा अनिल के संस्मरण- होली के तीन रंग
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 मंजीत ठाकुर का ललित निबंध
चलिये मेरे साथ मधुपुर
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पुनर्पाठ में पवन चंदन की इतिहास कथा
क्यों लगाते हैं गुलाल होली में
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अनुभूति में-- होली के अवसर पर विविध विधाओं मे रची अनेक रचनाकारों की रंग-रंगीली रचनाएँ।

स्थायी स्तंभों में-

गृह सज्जा में- बालकनी, जिसे हम छज्जा कहते हैं भारतीय शैली में सजा हो परंपरा का घना सौंदर्य देखते ही बनता है। इस अंक में- शाम के लिए आरामदायक फायर पिट

रसोईघर में- हमारी रसोई संपादक शुचि अग्रवाल होली के अवसर पर इस अंक में प्रस्तुत कर रही हैं- मिठाइयों और नमकीन के ढेर से व्यंजन

बागबानी में- गोल पत्तियों वाले वे बारह पौधे जो आपके घर का हर कोना सजा देंगे। इस अंक में प्रस्तुत है- वेरिगेटेड स्वीडिश आईवी

स्वास्थ्य के अंतर्गत- अच्छी नींद के बारह उपाय जो शरीर के सर्वश्रेष्ठ विश्राम दे और थकान से पूरी मुक्ति। इस अंक में प्रस्तुत है- सोने का समय निश्चित हो

बतरस से लिखवट तक - रतन मूलचंदानी के फोटो निबंध पत्थरों की दुनिया के- इस अंक में प्रस्तुत है- मुल्लम मुल्लम क्रीक

गौरवशाली भारतीय- क्या आप जानते हैं कि मार्च महीने में कितने गौरवशाली भारतीय नागरिकों ने जन्म लिया? ...विस्तार से

नवगीत संग्रहों और संकलनों से परिचय की शृंखला में- गरिमा सक्सेना के नवगीत संग्रह- बार बार उग ही आएँगे का परिचय अवनीश त्रिपाठी की कलम से।

वर्ग पहेली-३९५
गोपालकृष्ण-भट्ट-आकुल और
रश्मि आशीष के सहयोग से

हास परिहास
में पाठकों द्वारा भेजे गए चुटकुले

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"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह के पहले सप्ताह मे प्रकाशित होती है।

प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन, कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
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सहयोग : रतन मूलचंदानी
 पता-

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