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फुलवारी

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संगीत की धुन

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छुटकू भालू को संगीत अच्छा लगता है। वह गीत गाना जानता है। बहुत से वाद्य भी बजा लेता है। उसके तीन मित्र हैं- मनु, मीता और गीता। उनको भी संगीत पसंद है। वे सब मिलकर नई धुनें बनाते रहते हैं। नए नए गाने भी रचते हैं।

"चलो हम की नए साल के लिये संगीत की धुन बनाएँ।" छुटकू भालू ने कहा।
"हाँ हाँ जरूर, मनु ने कहा, "क्या तुम्हारे पास हारमोनियम है?"
"
नहीं मेरे पास हारमोनियम तो नहीं है।" छुटकू ने कहा।
"अच्छा हारमोनियम नहीं है तो कोई बात नहीं मैं झाँझ बजा लूँगा।

मीता को बाँसुरी बजाना आता था। मीता ने कहा वह बाँसुरी बजाएगी।
गीता के पास वायलिन था। उसको वायलिन बजाना आता था। गीता ने कहा वह वायलिन बजाएगी।

सारे मित्र मिलकर सब नए साल के लिये नया संगीत बनाने की तैयारी में लग गए।
छुटकू भालू संगीत निर्देशक बन गया। मनु झाँझ बजाने लगा। मीता बाँसुरी बजाने लगी और गीता वायलिन बजाने लगी।

नए साल के लिये संगीत की नई धुन तैयार होने लगी।

- पूर्णिमा वर्मन

१७ दिसंबर २०१२  

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