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लेखकों से
 १. ६. २०१७

इस पखवारे-

अनुभूति-में-
शशि पुरवार, गुलाब जैन, परमेश्वर फुँकवाल, ऋषभदेव शर्मा और अश्विनीकुमार विष्णु की रचनाएँ।

- घर परिवार में

रसोईघर में- इस माह गर्मी के उमस भरे मौसम में हमारी रसोई संपादक शुचि प्रस्तुत कर रही हैं शीतलता से भरपूर आम का शर्बत

स्वास्थ्य में- मस्तिष्क को सदा स्वस्थ, सक्रिय और स्फूर्तिदायक बनाए रखने के २४ उपाय- ९- व्यायाम और विश्राम

बागबानी- के अंतर्गत घर की सुख स्वास्थ्य और समृद्धि के लिये शुभ पौधों की शृंखला में इस पखवारे प्रस्तुत है- ९- बोस्टन फर्न

भारत के सर्वश्रेष्ठ गाँव- जो हम सबके लिये प्रेरणादायक हैं- ९- प्रशासनिक अधिकारियों वाला गाँव माधोपट्टी

- रचना व मनोरंजन में

क्या आप जानते हैं- इस माह (जून की विभिन्न तिथियों में) कितने गौरवशाली भारतीय नागरिकों ने जन्म लिया? ...विस्तार से

संग्रह और संकलन- में प्रस्तुत है- जगदीश प्रसाद जेंद की कलम से गीता पंडित के नवगीत संग्रह- ''दहलीज के भीतर बाहर'' का परिचय।

वर्ग पहेली- २९०
गोपालकृष्ण-भट्ट-आकुल और
रश्मि-आशीष के सहयोग से


हास परिहास
में पाठकों द्वारा भेजे गए चुटकुले

साहित्य एवं संस्कृति में- 

समकालीन कहानियों में प्रस्तुत है भारत से
नवीन कुमार-की-कहानी- गंगा स्नान

"अजी सुनती हो फेनी की माँ गजब हो गया।"
“ऐसा कौन पहाड़ टूट पड़ा जो इतना तेज़ चीख रहे हो?"
धनदेवी ने प्रतिक्रिया दी।
“अरे ये जो पड़ोस के मुहल्ले में शर्मा जी रहते थे ना..."
“कौन शर्मा जी...?"
“अरे चीनी मिल वाले..."
“अच्छा-अच्छा, जिनकी लड़की का रिश्ता अपने गाँव के कोटेदार के लड़के से हुआ है?"
“हाँ-हाँ, वे ही शर्मा जी।"
“हाँ, तो क्या हुआ उनको...?"
“अरे, उनके यहाँ चोरी हुई है, अख़बार में निकला है।"
“हे भगवान, क्या-क्या उठा ले गए..."
“अरे, छोड़ा ही कुछ नहीं, घर खाली कर गए।"
खबर खत्म होते ही सेठ रईसचन्द के चारों लडकों में से तीन वहाँ आ धमके और क्या हुआ, क्या हुआ के नारे लगाने लगे..
और सेठ रईसचन्द बची-खुची खबर को और जोर-जोर से पढ़ने लगे- “मूल रूप से अल्हागंज के निवासी रघुवीर शर्मा के यहाँ कल रात अज्ञात व्यक्तियों के द्वारा नकब लगाकर चोरी की वारदात...आगे-
*

प्रेरणा गुप्ता की लघुकथा
अँजुरी भर पानी
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सुरेश गाँधी से पर्व परिचय
गंगावतरण का पर्व गंगा दशहरा
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शंभुनाथ शुक्ल का यात्रा प्रसंग
गंगोत्री की ओर

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पुनर्पाठ में नीरजा माधव का
ललित निबंध- रुकोगी नहीं भागीरथी

पिछले पखवारे-

विनोद कुमार दवे का
व्यंग्य- मोबाइल
*

विमलेश त्रिपाठी का आलेख
हिंदी कविता के दो अतिवाद
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पर्व परिचय में अग्निशेखर से जानें
'नवरेह' है कश्मीरियों का विशेष नवसंवत्सर

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पुनर्पाठ में अतुल अरोरा के संस्मरण
''बड़ी सड़क की तेज गली में'' का दसवाँ भाग

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समकालीन कहानियों में प्रस्तुत है भारत से
सुमति सक्सेना लाल-की-कहानी- आखिरी घर

अजब लगता है सोच कर कि किस्मत ने मुझे ज़िंदगी के आखि़री मुहाने पर अपने घर के इतना नज़दीक पहुँचा दिया, फिर भी इतना दूर। थोड़ा सा टहल कर उस घर के आस-पास जाने की इच्छा तक नहीं होती। कौन है भला मेरा वहाँ। मुझे तो कुछ भी नहीं पता कैसी थी बापू की पत्नी। कितने बच्चे थे उनके। जाऊँ उस घर में तो क्या बताऊँ उन सबको? ईंट गारे से बने मकान भर को क्या घर पुकारा जा सकता है? सोचती हूँ बगल में अब कौन रहता होगा? ओम प्रकाश या कोई और? क्या करना है मुझे। अब तो कुछ जानने सोचने की इच्छा भी नहीं होती। इसी सड़क पर कोठियों के पीछे बनी गली के उस ओर था हमारा छोटा सा घर। यहीं के गर्वन्मैंट गर्ल्स स्कूल में पढ़ती थी मैं। उस घर के आँगन और सामने की गली में खेलते-कूदते सोचा था कहीं, कि थोड़ी ही दूर पर बने इस वृद्धा आश्रम में बीतेंगे मेरी ज़िन्दगी के आखि़री दिन। शाम होती है तो आकर खिड़की पर खड़ी हो जाती हूँ। धुंधलका होने से पहले ही पूरे बाजार की रोशनियाँ जल जाती हैं। इतनी तेज़ चमक के साथ कि आँखें चौंधियाने लगती हैं।...आगे-

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"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है
यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को प्रकाशित होती है।


प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन, कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन

 
सहयोग : कल्पना रामानी
 

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