मुखपृष्ठ

पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार हिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP            पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org


साहित्य संगम

साहित्य संगम के इस अंक में प्रस्तुत है जयवंत दलवी की मराठी कहानी का हिंदी रूपांतर स्पर्श

सायंकाल की सुनहरी किरणें, अब तक ज़मीन पर उतरी नहीं थी। इस बड़े पीपल की, शाखों के बीच से, छन कर आती लग रही थी। हवा के स्पर्श से पूरा वृक्ष, गुदगुदा कर मानों हँस रहा था। तने के, एक खोखल में से एक तोता चोंच निकाले, झाँक रहा था। एक शाख पर, लंबा-सा घोंसला, लटक रहा था। किस पक्षी का था कौन जाने?

वृक्ष के नीचे, आसमान की ओर ताकते, रामाराव खड़े थे। उनकी आँखों के आँसू, आँखों तक ही सिमट रहे थे, इसका किसी को पता न था।

आज आँखें, न जाने क्यों भर आ रही हैं। चार वर्ष पूर्व जब नानी आश्रम गई थी, तब भी आँखें, इतनी तो नम नहीं थी। आज तो वह ठीक होकर, वापस आ रही हैं, आज तो मन में, आनंद होना चाहिए। पर आनंद हो रहा है क्या?

पीपल के नीचे, एक पूरी मंडली, नानी की बाट जोह रही थी। नानी का बेटा, वीनू। उसकी पत्नी अनुराधा। उनका आठ वर्ष का बेटा रंगा, आस-पड़ोस की औरतें और बच्चे सभी जमा हुए थे।
''रंगा, दादी के बुलाने पर भी, पास नहीं जाना समझे!'' अनुराधा, रंगा को बार-बार समझा रही थी।

पृष्ठ  . . .

आगे--

इस रचना पर अपनी प्रतिक्रिया लिखें - दूसरों की प्रतिक्रिया पढ़ें

Click here to send this site to a friend!

पुरालेख तिथि अनुसार । पुरालेख विषयानुसार हिंदी लिंक हमारे लेखक लेखकों से
SHUSHA HELP // UNICODE  HELP / पता- teamabhi@abhivyakti-hindi.org

© सर्वाधिका सुरक्षित
"अभिव्यक्ति" व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक
सोमवार को परिवर्धित होती है।