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घर-परिवार वे पुराने धारावाहिक


वे पुराने धारावाहिक
जिन्हें लोग आज तक नहीं भूले


१- हम लोग
७ जुलाई १९८४ से प्रसारित होने वाला ''हम लोग'' भारतीय टीवी का पहला पारिवारिश धारावाहिक था। बसेसर राम और उनके परिवार के सदस्य दादी, बड़की, छुटकी, नन्हें और अन्य सदस्यों को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला यह धारावाहिक मनोहर श्याम जोशी ने लिखा था और इसका निर्देशन पी.कुमार वासुदेव ने किया था। इसका संगीत अनिल विश्वास ने दिया था। १५६ कड़ियों वाला यह धारावाहिक आधे घंटे का था और इसका अंतिम एपिसोड एक घंटे का। धारावाहिक के अंत में उस समय के महान अभिनेता अशोक कुमार मुहावरेदार भाषा में अगली कड़ी की कहानी का संक्षेप बताया करते थे। एक सर्वेक्षण के अनुसार जहाँ हिंदी नहीं बोली जाती उन भागों में भी लोग इसे खूब देखते थे। रोचक बात यह है कि इसी धारावाहिक से टीवी में विज्ञापन का युग प्रारंभ हुआ। मैगी नूडल्स का विज्ञापन इस धारावाहिक में दिखाया जाने वाला पहला टीवी का पहला विज्ञापन बना। जैसे जैसे हम लोग की लोकप्रियता बढ़ी, मैगी नूडल्स का व्यापार भी बढ़ता गया। इसे देखकर बाद में अनेक कंपनियाँ टीवी विज्ञापन के क्षेत्र में आईं। आज इस धारावाहिक समाप्त हुए दशकों बीत गए हैं लेकिन बसेसर राम का परिवार आज भी लोगों के दिलों में बसता है।

१ जनवरी २०२

(अगले अंक में एक और धारावाहिक)  पृष्ठ- .

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