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कहानियों में
टाइगर मेरा यार

 

पुष्पा राव

पुष्पा राव नागपुर, मध्य प्रदेश में पैदा हुईं। सेट जोज़फ़ कॉन्वेंट में पढ़ाई की। कॉन्वेंट में हिन्दी में बातचीत करना भी अपराध माना जाता था। मातृभाषा तेलुगु और स्कूल की भाषा अंग्रेज़ी होते हुए भी, हिन्दी भाषा केन्द्र से हिन्दी शिक्षा प्राप्त की। हिन्दी राष्ट्रभाषा केन्द्र, वर्धा से कोविद की परीक्षा उत्तीर्ण की। आन्ध्र प्रदेश के विजयनगर कॉलेज से बी.ए. की पढ़ाई पूरी करते ही विवाह हुआ और वे इंग्लैण्ड आ गईं।

कुछ वर्षों तक बच्चों की परवरिश के बाद हिन्दी शिक्षण में प्रवेश किया। बीस वर्षों तक कलानिकेतन हिन्दी पाठशाला में हिन्दी शिक्षण में सहयोग दिया। बी.बी.सी. रेडियो नॉटिंघम में हिन्दी कार्यक्रम की प्रोड्यूसर और प्रेज़ेंटर के रूप में बीस वर्षों तक कार्य किया। लिखने का शौक़ प्रारम्भ में निबंध और अनुवाद कार्य तक सीमित था। गीतांजलि कार्यशाला की मदद से लेखन की विधिवत शुरुआत हुई। एक कहानी-संग्रह ज़िन्दगी की शाम और एक कविता-संग्रह जीवन के कुछ पल प्रकाशित हुए हैं।

कई कवि-सम्मेलनों में, भारत और इंग्लैण्ड में, उन्होंने सहभागिता की है। नॉटिंघम के लॉर्ड मेयर से सम्मानित हुईं। लखनऊ में अमृता प्रीतम पुरस्कार, बेंगलुरु में महात्मा गांधी पुरस्कार तथा बेंगलुरु महिला हिन्दी सभा द्वारा सम्मान प्राप्त हुआ। बर्मिंघम में हाई कमीशनर द्वारा हिन्दी कार्य के लिए सम्मानित की गईं।

हिन्दू मन्दिर, नॉटिंघम की पत्रिका के सम्पादन में सहभागिता रही है तथा नॉटिंघम प्ले हाउस की डायरेक्टर रहीं। नॉटिंघम एशियन आर्ट्स की स्थापना और संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। कलाकारों की सहायता करना और उनका आतिथ्य करना उनके कार्य का महत्त्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उनकी कई कहानियाँ विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।

ईमेल-
prao@sky.com

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