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व्यक्तित्व

अभिव्यक्ति में केशवचंद्र अग्रवाल
की रचनाएँ

पुराण कथा
महर्षि कश्यप के वंशज सम्पाति और जटायु

 

केशवचंद्र अग्रवाल

सन १९८० से वैश एंड को (चार्टर्ड अकाउंटेंट) में ऑडिटर रहे। साल में सात से आठ महीने चीनी मिलों में रहना पड़ता था। बहुधा मिलों में बिहार के एक प्रसिद्ध कथावाचक पंडितजी आया करते थे। हर मिल में उनका लगभग आठ से दस दिनों का कथावाचन का प्रोग्राम होता था। कथा में पंडितजी किसी एक विषय को उठाते थे, और उसका पूरा विश्लेषण करते हुए उसे समझाते थे। इन कथाओं का मन पर गहन प्रभाव पड़ता था और अधिक जानने और सोचने की इच्छा होती थी।

धामपुर शुगर फ़ैक्टरी की मासिक पत्रिका में कई लेख प्रकाशित हुए। इसके बाद लखनऊ में कई सालों तक रहने का अवसर मिला, और वहाँ पंडित रामकिंकर जी के कथावचन को सुनने का अवसर भी कई बार प्राप्त हुआ। वहीं से अपनी थाती से कुछ कुछ खोज कर लिखने की भावना का उदय हुआ, और इसने पौराणिक आख्यानों और लेखों का रूप लिया।

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