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इंडिया@क्रासरोड नाटक देखने गैसवर्कस् थिएटर पोर्ट मेलबर्न
जाना हुआ था। इसी परिसर में एक कलाकृतियों की प्रदर्शनी का
हॉल भी था। तो यह स्थल एक तरह से थिएटर के साथ साथ कला
प्रदर्शन को भी समर्पित था। इस कारण बिल्डिंग के बगीचे में
भी कुछ अमूर्त कलाकृतियाँ बना रखी थीं।
छोटे मोटे पत्थरों को जोड़कर बनी यह मूर्ति बहुत भली लग
रही थी, विशेष कर ऊपर के तीन पत्थर। उनका झुका होना सच में
बहुत मोहकता लिए था। कलाकार इस कृति से क्या दर्शाना चाह
रहा है यह मेरी समझ से बाहर है। बस मैं तो देख कर ही निहाल
हो गया था।
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रतन
मूलचंदानी
१ फरवरी २०२६
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