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 बतरस से लिखवट                                         विदेश में बरगद

विशालकाय पेड़ो का अपना सम्मोहन होता है। उनकी गगनचुम्बी उँचाई, बड़ा सा गोलाकार तना और घने पत्तों से बना छत्र उनकी विशेष पहचान होती है। बरगद का पेड़ तो विशाल है ही, उसकी शाखाओं से निकली जटाएँ जो जमीन से जुड़कर तना बन जाती है उसका एक अलग गुण है। इन जटाऔं से बने तने इसे काफी दूर दूर तक फैला देते हैं। यह भारत का राष्ट्रीय वृक्ष भी है। इसमें हमारे तीनों प्रभु, ब्रह्मा, विष्णु और महेश जी का वास है यह मान्यता है।
मुझे इसके दर्शन हुए ब्रिसबेन में, मेन शहर के एक मुख्य चौक पर। चारों तरफ व्यस्त सड़कों और बहुमंजिली इमारतों से घिरा इसका होना एक अलग सा सुकून दे रहा था। बहुत ही सुंदर लग रहा था इसका वहाँ पर होना।

- रतन मूलचंदानी

१ जुलाई २०२३

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