पता
नहीं क्यों आजकल पहले से घूमी जगहों पर भी कुछ नया सा दिख
जाता है। जानता हूँ ऐसा क्यों है।
उम्र के इस पड़ाव पर
भागमभाग जरा धीमी पड़ गई है, विचारो में भी और गतिविधियों
में भी। इस धीमे पन के कारण निगाहों को काफी समय मिल जाता
छूटी हुई चीजों को पकड़ने में। और इसका अपना आनन्द है
क्योंकि ये चीजें या तो अनूठी होती हैं या सुंदर।
शनिवार १८ जनवरी को शहर गया
था बिटिया को कार देने। १६ को न्यूकॉसल से आई थी सपरिवार
और शहर में रुक गई थी। १८ को घर आने से पहले जिलाँग में
अपने एक मित्र परिवार से मिल आना चाहते थे। उनको कार देकर
वापसी रेल से करनी थी। एलिजाबेथ व कॉलिंस स्ट्रीट क्रासिंग से
पता नहीं कितनी बार आया गया हूँ पर याद नहीं कभी इस मूर्ति को देखा
हो। बहुत सुंदर लग रही |