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 बतरस से लिखवट                                             सिल्वर वेव्ज़

दीपावली से पहले घर की सफाई व पुताई एक जरूरी गतिविधि होती थी जब हम बच्चे व युवा थे। पुताई चूने से होती थी तो उसे सफेदी भी कहते थे। पिछले तीस-चालीस सालों में बहुत से भारतीय कई सारे देशो में बस गए हैं। इस कारण दिवाली त्यौहार के बारे में अब कई सारे देश जानने लगे हैं। ऑस्ट्रेलिया भी उनमें से एक है।

कल यहाँ एक पौधे से मुलाकात हुई। उसे लगा मैं तो ईसाई वाले देश में हूँ तो क्यों न क्रिसमस पर अपनी सफेदी करवा लूँ दीपावली पर्व की तरह। इस पौधे के सभी पत्ते व फूल की डंडियाँ सफेद रंग लिए थे। यह सफेदी हाथ लगाते ही उतर जाती थी और हरापन नजर आने लगता था। यह सफेदी कब आती है और कब जाती है पता नहीं। इंटरनेट ने इसका नाम बड़ा प्यारा सा बताया - सिलवर वेव्ज़ यानि चाँदी की लहरें।

- रतन मूलचंदानी

१ नवंबर २०२४

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