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प्रभु
भी अपनी रचनाओं मे बचपना बनाए रखता है। हम सभी जानते हैं
बच्चों की बनाई चीजों मे बढ़िया सा बिखराव होता है।
बस उसी तरह, इस पौधे की शाखाऐं तो बिना किसी ढाँचे के
चारों ओर फैली हुई है ही इसके फूल की मटर की फलीनुमा
पंखुरियाँ भी अपनी मस्ती मे जहाँ मन हुआ फैल गई हैं। इन
पंखुरियों का पीला रंग हल्के से हरे रंग से साथ मनमोहक
लगता है।
यह पौधा ऑस्ट्रेलिया का स्थानीय पौधा है और इसके फूल लाल
रंग मे भी आते हैं। अब लोकल है तो नाम भी तो थोड़ा लोकल
मस्ती के साथ होना चाहिए ना। इसे कंगारू पंजा कहा जाता है।-
रतन
मूलचंदानी
१ अगस्त २०२४ |