सीधे
आसमान की ओर फूलने वाले इस फूल को कहीं पर भी, अभी तक,
बलखाते मैंने नहीं देखा था। १५/१२ को न्यूकॉसल यूनि में
दीक्षांत समारोह वाले दिन जब आसपास मंडरा रहा था तो इस पर
निगाह अटक सी गई। एक पक्षी का आकार सा ले लिया था इसने। मन
में पक्षी का आकार तो घूम रहा है पर पक्षी का नाम याद नहीं
आ रहा। तोते का रूप मान लेते हैं।
एक और कारण था इस पर ध्यान जाने का। जरा ध्यान देंगे तो
फूल के पीछे माईक्रोस्कोप दिख रहा होगा। बस इस फूल को लगा
कि मैं अपना भी अवलोकन करवा लूँ। पर बिना टेड़ा हुए तो यह
संभव नहीं था तो इसने अपने को नया आकार दे दिया। फूल का यह
अनोखा रूप भला लग रहा था।
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रतन
मूलचंदानी
१ मई २०२४ |