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संस्कृति


जप की माला- कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
संकलित आलेख


माला का प्रयोग मन की एकाग्रता के लिए किया जाता है, जप के माध्यम से मन के मतवाले घोड़े को नियंत्रण में रखा जा सकता है। जिससे अपार भौतिक व आध्यात्मिक उपलब्धियाँ प्राप्त हो जाती है।

माना जाता है कि माला फेरते समय अंगूठे व अंगुलियों के मध्य घर्षण से एक प्रकार की विद्युत उत्पन्न होती है, जो धमनियों द्वारा सीधे हृदय चक्र को प्रभावित करती है। इससे मन स्थिर होता है। यह तभी प्रभावी होता है, जब जप करने वाले के मन का मैल धुला हुआ हो।

१०८ मनकों का महत्व
श्रद्धा, भक्ति और समर्पण की प्रतीक माला के १०८ मनके अपने में गूढ अर्थ संजोये हुये है। भारतीय ऋषियों ने एक वर्ष में २७ नक्षत्र बताये है। प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते है इस प्रकार १०८ चरण होते है। इसीलिये ज्योतिर्विज्ञान में यह संख्या शुभ मानी जाती है। जैन मत में भी १०८ मनको की माला को पवित्र माना जाता है। मन, वचन और कर्म से जो हिंसा आदि पाप होते है, वे 36 प्रकार के होते है। इन्हें स्वंय करने, दूसरों से कराने, तथा करते हुए को सराहने से यह संख्या 36 का तीन गुना यानि १०८ हो जाती है। बौद्ध मत में भी यह संख्या शुभ मानी जाती है। बुद्ध के जन्म के समय १०८ ज्योतिषियों के उपस्थित होने का प्रसंग मिलता है। बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले देश जापान में श्राद्ध के अवसर पर १०८ दीपक जलाने की प्रथा है।

मालाओं के प्रकार और चुनाव
जप मालाएँ मंत्रोच्चार, ध्यान और आध्यात्मिक विकास के लिए उपयोग की जाने वाली पवित्र प्रार्थना मालाएँ हैं। प्रत्येक माला में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि बीज, लकड़ी या क्रिस्टल, के आधार पर उसकी अपनी अलग-अलग कंपन होती है। सही माला का चुनाव आपको ध्यान में बेहतर एकाग्रता प्राप्त करने, ऊर्जा संतुलन बनाए रखने और यहां तक ​​कि सकारात्मकता से अपने दैनिक जीवन को समृद्ध करने में मदद कर सकता है। छह प्रमुख प्रकार की मालाओं के महत्व को इस प्रकार बताया गया है।

डायमंड कट स्फटिक जप माला
हीरे की तरह चमकने वाले पहलूदार स्फटिक के मोतियों से बनी इस माला में तराशने के कारण मोती जगमगाते हैं और माना जाता है कि इससे क्रिस्टल की प्राकृतिक ऊर्जा बढ़ जाती है। इसकी शक्ति देवी लक्ष्मी, ग्रह शुक्र और विषय स्पष्टता, सामंजस्य और सौंदर्य माना गया है। बिना कट वाली स्फटिक की माला जपने से भी ध्यान अधिक एकाग्र और प्रकाशमय हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि मंत्रों में इसका प्रयोग आध्यात्मिक: स्पष्टता, भक्ति और शांति को बढ़ाता है, मानसिक तनाव कम करता है और स्पष्ट सोच को बढ़ावा देता है, शरीर को ठंडा करने, चिंता को शांत करने और सिरदर्द से राहत दिलाने में सहायक होता है और यह समृद्धि तथा रिश्तों में सामंजस्य और सौभाग्य को आकर्षित करती है। कटिंग वाली माला इन सभी लाभों को अधिक मात्रा में आकर्षित करती है।


तुलसी की माला
लाभ, शक्ति और महत्व को देने वाली होती है। पवित्र तुलसी के पौधे से बनी तुलसी की मालाएँ भगवान विष्णु और कृष्ण से गहराई से जुड़ी हुई हैं। ये पवित्रता भक्ति और दैवीय संरक्षण प्रदान करती हैं। तुलसी को भक्ति का प्रतीक माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि तुलसी माला पर किया गया जप जपने वाले की आभा को शुद्ध करता है, नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है और भक्ति (समर्पण) को बढ़ाता है। उसे भगवान विष्णु और कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हृदय शांति से भर जाता है, भय और नकारात्मकता को दूर हो जाती है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और स्फूर्ति को बढ़ावा देता है साथ ही सद्भाव, सौभाग्य और पारिवारिक खुशहाली लाता है। यह कृष्ण या विष्णु के भक्तों और पवित्रता और दिव्य सुरक्षा चाहने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए सर्वोत्तम है।

भूरे रुद्राक्ष की जप माला
लाभ, शक्ति और महत्व की प्रतीक यह माला सुरक्षा, शक्ति, आध्यात्मिक जागृति प्रदान करती है।
रुद्राक्ष की माला धारण करना आध्यात्मिक महत्व रखता है और इसे धारण करना मानो शिव का आशीर्वाद धारण करना है। यह ऊर्जा को संतुलित करता है, नकारात्मकता से बचाता है और ध्यान को गहरा बनाता है।
भूरे रुद्राक्ष की माला के जप से साधक शिव की ऊर्जा और भक्ति से जुड़ता है। उसके मानसिक तनाव, भय और चिंता कम होते हैं, रक्तचाप को स्थिर करता है और मन को शांत करता है। यह माला व्यावसायिक जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास लाती है। शिव के भक्तों को, ध्यान करने वालों को और सुरक्षा चाहने वालों को इस माला पर शिव का मंत्र जपना चाहिये।

काले रुद्राक्ष की जप माला
दिव्य ऊर्जा का एक मजबूत कवच, गहरे रंग का रुद्राक्ष सुरक्षा के लिए बहुत शक्तिशाली माना जाता है। इसके प्रमुख देवता: भगवान शिव हैं, जिनका संबंध शनि ग्रह से भी है। यह अपने भक्त को गहन सुरक्षा, और आंतरिक शक्ति प्रदान करती है। ऐसा माना जाता है कि काला रुद्राक्ष नकारात्मकता को अवशोषित करता है और पहनने वाले को कवच की तरह सुरक्षा प्रदान करता है। यह बुरी शक्तियों से रक्षा करता है, इच्छाशक्ति और भावनात्मक लचीलेपन को मजबूत करता है, मन और शरीर को संतुलित करता है, तनाव कम करने में मदद करता है तथा चुनौतियों के दौरान आत्मविश्वास और शक्ति प्रदान करती है। नकारात्मकता का सामना करने वालों, आध्यात्मिक साधकों और शनि के प्रभाव में रहने वाले लोगों के लिए यह सबसे उपयुक्त है। इस पर भी शिव का मंत्र जपना चाहिये।

चंदन की माला
चंदन की माला दो प्रकार की होती है। लाल चंदन की माला (ऊर्जा, समृद्धि) और पीले चंदन की माला (शांति, ज्ञान) आध्यात्मिक और स्वास्थ्य लाभों के लिए विशेष है। लाल चंदन मंगल दोष शांत करने, लक्ष्मी-दुर्गा साधना और मानसिक एकाग्रता के लिए उत्तम है। इसे माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और गणेश जी के मंत्रों के जाप के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। यह जन्म कुंडली में मंगल दोष को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए पहनी जाती है। इसे धारण करने से सौभाग्य, साहस, शक्ति और धन में वृद्धि होती है। पीले या सफेद चंदन की माला विष्णु-कृष्ण और राम की उपासना, शांति और सौभाग्य के लिए उपयोगी है। ये मालाएँ तनाव कम करने में भी सहायक हैं। मानसिक तनाव दूर करने, ध्यान केंद्रित करने और मन को शांत रखने के कारण ये विद्यार्थियों के लिये उपयोगी समझी जाती हैं। इसे धारण करने से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

करुणगली मनकों की जप माला
करुणगली मालाएँ (काली आबनूस की लकड़ी) से बनी होती है, जिसे दक्षिण भारत में पवित्र माना जाता है। ये शासन और ऊर्जा प्रदान करती हैं। भगवान शनि, गणेश और देवी काली के मंत्रों का जप करने के लिये इन्हें उपयुक्त माना जाता है। इन देवताओं के साधक इन्हें पहनते भी है। ये सुरक्षा, स्थिरता, आंतरिक शक्ति प्रदान करने वाली मानी गयी हैं। करुणगली माला बुरी नजरों को दूर भगाने और आभा को मजबूत करने के लिए जानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह ऊर्जा को संतुलित करती है और स्वभाव में लचीलापन प्रदान करती है। यह नींद में सुधार, तनाव में शांति, आध्यात्मिक एकाग्रता के उत्थान और सकारात्मक ऊर्जी की रक्षा करती है। यह सांसारिक जीवन में स्थिरता और संतुलन बनाती है। सुरक्षा, आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति का विकास चाहने वालों को इसे पहनना चाहिये।

१ जून २०२५

 
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