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सत महाराज को द्वितीय भारतवंशी गौरव सम्मान 

हाइकु दिवस समारोह सम्पन्न

त्रिनिडाड और टुबैगो के प्रमुख समाजसेवी और शिक्षाशास्त्री श्री सत नारायण महाराज को दूसरे भारतवंशी गौरव सम्मान द्वारा सम्मानित करने का निर्णय किया गया है। अन्तर्राष्टीय सहयोग न्यास की चयन समिति के संयोजक श्री विजेन्द्र मित्तल ने यह घोषणा करते हुए बताया कि प्रतिवर्ष न्यास द्वारा यह सम्मान उस भारतवंशी को प्रदान किया जाता है जिसने विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिए उल्लेखनीय सेवा कार्य किए होते हैं। साथ ही उन देशों और भारत के मध्य अच्छे एवं प्रगाढ़ संबंध बनाने में विशेष योगदान किया होता है।
श्री मित्तल ने बताया कि इस सम्मान के लिए चयनित विभूति को एक लाख रूपए‚ स्मृति चिन्ह‚ शाल और प्रशस्ति पत्र भेंट करके सम्मानित किया जाता है । इस वर्ष यह सम्मान श्री सत नारायण महाराज को एक भव्य समारोह में भारत के पूर्व प्रधान मंत्री श्री इन्द्र कुमार गुजराल द्वारा प्रदान किया जायेगा। भारत में मारिशस के उच्चायुक्त श्री मुकेश्वर चुन्नी इस समारोह में वश्ष्ठि अतिथि होंगे। सम्मान समारोह 23 दिसम्बर 2006 को सायं 5 बजे हिन्दी भवन सभागार‚11 विष्णु दिगम्बर मार्ग‚ राउज एवेन्यू‚नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। सम्मान अर्पण के पश्चात एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा। 

श्री सत नारायण महाराज के विषय में जानकारी देते हुए श्री विजेन्द्र मित्तल ने कहा कि 75 वर्षीय श्री सत नारायण महाराज त्रिनिडाड और टुबैगो में कार्यरत सनातन धर्म महासभा के महा सचिव हैं। यह सस्था त्रिनिडाड और टुबैगो में ही नहीं समस्त कैरेबियन देशों में सबसे अधिक सक्रिय संथाओं में प्रमुख मानी जाती है। इस संस्था द्वारा चलाए जाने वाले साठ स्कूलों में बिना किसी प्रकार के भेद भाव के बच्चों को मूल्यों पर आधारित शिक्षा दी जाती है। सत नारायण महाराज ने त्रिनिडाड के सामाजिक‚धार्मिक और शिक्षा के क्षेत्रों को ही नहीं बल्कि वहां की राजनीति को भी अपनी निडर और जुझारू छवि से प्रभावित किया है। उनके द्वारा निस्वार्थ समाज सेवा‚ भारतवंशियों के कल्याण और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए अथक प्रयास वहां पर किवदंतियां बन चुके हैं। 

न्यास के संबंध में जानकारी देते हुए श्री मित्तल ने कहा कि अन्तर्राष्टीय सहयोग न्यास की स्थापना 1996 में श्री बालेश्वर अग्रवाल द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उदेश्य विश्व में निवास कर रहे ढाई करोड़ भारतवंशियों को परस्पर और भारत के साथ जोड़ना है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष कम से कम एक भारतवंशी को सम्मानित करने का निर्णय किया गया। इसके लिए विश्व भर के वरिष्ठ एवं अपने अपने क्षेत्रों में उच्चस्थ पदों पर बैठे लोगों की एक समिति बनाई गई। समिति में मारिशस‚ त्रिनिडाड – टुबैगो और फिजी के पूर्व प्रधान मंत्रियों श्री अनिरूद्ध जगन्नाथ‚ श्री वासुदेव पांडे़ और श्री महेन्द्र चौधरी को सम्मिलित किया गया। इनके अतिरिक्त जी टेली फिल्मस के प्रमुख श्री सुभाष गोयल और प्रमुख समाजसेवी श्री बालेश्वर अग्रवाल जैसे व्यक्तित्व इसमें सम्मिलित किए गए हैं। 

–– मनोहर पुरी

गाजियाबाद : 4 दिसम्बर 2006 : विश्व की सबसे छोटी कविता के रूप में चर्चित हाइकु पर केन्द्रित हाइकु दिवस समारोह का आयोजन स्थानीय गान्धर्व संगीत महाविद्यालय में महानगर के प्रमुख साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों की उपस्थिति में किया गया। समारोह का आयोजन हिन्दी भाषा समेत तमाम भारतीय भाषाओं में हाइकु कविता को आन्दोलन का रूप देने वाले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व जापानी प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ . सत्यभूषण वर्मा के 75वें जन्म दिन (जन्म 04 दिसम्बर 1932 ई0) के उपलक्ष्य में किया गया। प्रो . वर्मा का 13 जनवरी‚ 2005 को स्वर्गवास हो गया था। प्रो .सत्यभूषण वर्मा के जन्मदिन को हाइकु दिवस के रूप में मनाए जाने की पहल के आधीन यह सर्वप्रथम आयोजन था।

हाइकु दिवस समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात कथाकार से . रा . यात्री ने की तथा संचालन ओम प्रकाश चतुर्वेदी पराग ने किया। कार्यक्रम के संयोजक कमलेश भट्ट कमल ने हाइकु कविता के शिल्प और उसके इतिहास तथा सौन्दर्य बोध व हिन्दी में उसके व्यापक परिदृश्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कवि एवं वृतचित्र निर्माता–निर्देशक नरेन्द्र तोमर ने हाइकु की संक्षिप्तता को‚ चीजों को छोटा बनाकर खूबसूरती के साथ प्रस्तुत कर देने की जापानियों की कला से जोड़कर देखा तथा इस सन्दर्भ में बोनसाई की विशेष रूप से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जापानियों के जीवन में जो जबर्दस्त अनुशासन है उसका प्रभाव उनकी कलाओं में भी दिखाई देता है।

कार्यक्रम में बोलते हुए सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ . कुंअर बैचेन ने कहा कि जैसे दोहा और श्लोक स्वतंत्र और पूर्ण रचनाएं हैं‚ वैसे ही हाइकु भी अपने आप में पूर्ण व स्वतंत्र विधा है। उन्होंने जापान से आई इस 17–अक्षरी हाइकु कविता को अन्तर्राष्ट्रीय विधा बताते हुए महाकवि बाशो द्वारा इस क्षेत्र में अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्य किए जाने का उल्लेख किया।

अपने अध्यक्षीय भाषण में कथाकार से . रा . यात्री ने कहा कि हमारे साहित्य में विशेषकर प्राचीन साहित्य में सूत्र के माध्यम से बहुत सारी बातें कह दी जाती थीं। ऐसा लगता है कि उसी सूत्रात्मकता को जापानियों ने अपने ढंग से कविता के रूप में ढाल दिया। हाइकु किसी बड़ी रचना को कम्प्यूटर की मेमोरी चिप की तरह सुरक्षित कर लेने का भी ढंग है। समारोह में डॉ . अंजु सुमन‚ डॉ . कुंअर बेचैन‚ कमलेश भट्ट कमल‚ ओम प्रकाश चतुर्वेदी 'पराग'‚ कुसुम अग्रवाल‚ नेहा बैद‚ पुष्पा रघु आदि ने अपनी हाइकु कविताएं प्रस्तुत कीं‚ जिन्हें श्रोताओं ने खुले मन से सराहा। कार्यक्रम में साहित्यकार एवम् बिल्डर बी . एल . गौड़‚ उद्योगपति संजय बिन्दल‚ लघुकथाकार कालीचरण प्रेमी‚ संगीतकार डॉ . विमला गुप्ता‚ साहित्यिक संस्था 'गीताभ' के सदस्य राम नारायण मिश्र‚ राम स्वरूप भास्कर‚ कृष्ण मित्र‚ व्यापार कर अधिकारी राजनाथ तिवारी तथा प्रबन्धक ओ . पी . पुरोहित आदि के सार्थसाथ गान्धर्व महाविद्यालय के रंगकर्मियों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। 

—अनुराधा भट्ट

24 दिसंबर 2006

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