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प्रेरक-प्रसंग

लघुकथाओं के क्रम में इस माह प्रस्तुत है
प्रेरणा गुप्ता प्रेरक प्रसंग- नाराज सूरज


एक प्यारा-सा, सुन्दर-सा संसार था! बिल्कुल हमारे संसार जैसा! सभी बहुत खुशहाल जीवन बिता रहे थे! रोज सुबह होती, सूरज निकलता और सभी अपनी दिनचर्या में शामिल हो जाते! बच्चे तैयार होकर स्कूल जाते, बड़े अपने ऑफिस जाते! किसान खेतों में हल चलाते! पक्षी चहचहाते! पेड़-पौधे खुशी से झूमते और फूल खिलने लग जाते! फिर धीरे से रात हो जाती और सब सो जाते! ऐसे ही दिन बीत रहे थे! कभी गर्मी, कभी जाड़ा और कभी बरसात...

परन्तु उस संसार में कुछ ऐसे भी लोग थे, जो कभी खुश नहीं रहते थे! उन्हें हर बात में कमी नज़र आती थी! शिकायत करना तो उनकी आदत में शामिल हो गया था! वे सूरज के बारे में भी हर वक्त कुछ-न-कुछ कहते ही रहते थे! गर्मी आती तो कहते कि आज सूरज आग बरसा रहा है, जाड़ा आता तो कहते कि सूरज की धूप बहुत हल्की है और बारिश होती तो कहते, पता नहीं सूरज कहाँ छिप गया है! कुछ-न-कुछ बोलना ही रहता था उनको!

सूरज न जाने कितने सालों से ये सब सुनता रहता था, किन्तु एक दिन उसने उन्हें सबक सिखाने की सोची, जो हर वक्त शिकायत में जीते थे। एक दिन रोज की तरह घड़ी में सूरज निकलने का समय तो हो गया, किन्तु सूरज ही उदय नहीं हुआ! मानो रात ही थी अभी तक! अंधकार छाया था चारों तरफ! सभी सूरज का इंतज़ार करते रहे! चिड़िया भी घोंसले से नहीं निकली और न ही फूल खिले! सभी घबराने लगे! सूरज को उदय होने के लिए प्रार्थना करने लगे, मगर सूरज ने उनकी कोई सुध न ली!

पेड़-पौधे सभी चिंतित हो गए, अब वे अपना भोजन कैसे बनाएँगे! क्योंकि पेड़-पौधे सूरज के प्रकाश की सहायता से ही कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से अपनी पत्तियों रूपी रसोई में अपना भोजन बनाते हैं! वे सोचने लगे कि पृथ्वी पर अब वे मनुष्य, पशु व पक्षियों के लिए ऑक्सीजन भी नहीं छोड़ पाएँगे, जिससे वे साँस लेकर जीवित रहते हैं! सभी प्राणी चिंता में डूबने लगे! सूरज के बिना तो पृथ्वी का तापमान भी गिर जाएगा! समुद्र की सतह भी जमकर ठोस हो जाएगी! हवा और बादल बनने लगेंगे! प्राणियों की जनसंख्या कम होते-होते एक दिन सब मर जाएँगे!

थक-हारकर सबने एक सभा बुलाई, जिसमें पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों के साथ-साथ चाँद, तारे, बादल सभी शामिल हुए! विचार-विमर्श के बाद बादल से, पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों की तरफ से सूरज को सारी समस्याओं से अवगत कराते हुए संदेश भेजा कि एक बार सूरज अपने दर्शन तो दे और अपना न उदय होने का कारण बता दे! बादल पृथ्वीवासियों की तरफ से सूरज के पास एक प्रार्थना-संदेश लेकर गया!

सूरज ने सारी बातें सुनीं और उसका दिल पिघल गया! वह अगले ही दिन अपने समय से उदय हो गया! उसे देख सभी बहुत प्रसन्न हुए और सबकी जान में जान आ गई! फिर सभी ने सूरज के न उगने का कारण पूछा! सूरज ने बड़े शांत भाव से कहा, “तुममें से अधिकतर लोगों को जीवन में शिकायतें ही रहती हैं। उसी आदत में पड़कर तुम मुझे भी कुछ-न-कुछ कहते रहते हो। फिर मैं भी प्रकृति का हिस्सा हूँ! मुझे तो तुम सबका ध्यान रखते हुए मौसम के साथ भी चलना है!”

सूरज की बात मनुष्यों को समझ में आ गई कि सब कुछ परिवर्तनशील है और वे खुशी-खुशी जीवन बिताने लगे!

 
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