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“शादी से पहले तुम चाँद-तारे
तोड़ कर लाने की बात करते थे, लेकिन अब तुम एक सितारों
वाली साड़ी भी नहीं लाते!”
चाँद जैसी जैस्मिन ने सिद्धार्थ से गुस्से में कहा।
उनकी शादी को अभी एक साल भी
नहीं हुआ था, लेकिन हनीमून पीरियड खत्म हो चुका था और घर
में कलह-क्लेश रहने लगा था। सिद्धार्थ एक अंतरिक्ष यात्री
(Astronaut) था, जो अपने काम में बहुत व्यस्त रहता था और
अपनी पत्नी को प्रेमिका जैसा समय नहीं दे पा रहा था। लेकिन
उसने जैस्मिन की बातों को दिल से लगा लिया।
उसने अपनी अंतरिक्ष यात्री
की नौकरी छोड़ दी—जिसमें अपेक्षाकृत कम पगार थी—और एक
अंतरिक्ष मर्चेंट नेवी कंपनी में नौकरी शुरू कर दी, जो
अंतरिक्ष में माइनिंग करती थी और बहुत अच्छी तनख़्वाह देती
थी।
“अब मैं तुम्हारे लिए अंतरिक्ष से हीरे-जवाहरात लाऊँगा।”
“लेकिन रहोगे मुझसे दूर ही!”
जैस्मिन ने व्यंग्यात्मक स्वर में कहा।
जैस्मिन सिद्धार्थ को जाने
नहीं देना चाहती थी, लेकिन वह जानती थी कि सिद्धार्थ उसकी
बात नहीं मानेगा। सिद्धार्थ अपनी कंपनी के साथ अंतरिक्ष
में चला गया। उन्होंने अनेक आकाशीय पिंडों में माइनिंग की
और बहुमूल्य खनिज पदार्थ खोजे। लेकिन उनकी भूख नहीं मिट
रही थी। वे पृथ्वी से बहुत दूर निकल गए—सौरमंडल को पार कर
सितारों से भी आगे।
उनका लक्ष्य हीरों से बने
ग्रह थे। इस तरह वे दूरी, समय और समय के विभिन्न आयामों को
पार करते गए। उन्होंने बहुत कुछ देखा—अमूल्य रत्न,
हीरे-जवाहरात एकत्र किए। जब उन्हें लगा कि वे अब दुनिया के
सबसे अमीर व्यक्ति बन जाएँगे, तब उन्होंने अपने
अंतरिक्ष-यान का रुख पृथ्वी की ओर मोड़ दिया।
लेकिन जब वे पृथ्वी पर लौटे,
सौ से अधिक वर्ष बीत चुके थे।
दुनिया पूरी तरह बदल चुकी थी—हर ओर उड़ने वाली कारें,
गगनचुंबी इमारतें और तकनीकी क्रांति। उन्हें बहुत बड़ा
झटका लगा। उनकी कंपनी भी अब अस्तित्व में नहीं थी, लेकिन
वे जो कीमती सामान साथ लाए थे, वह अत्यंत मूल्यवान सिद्ध
हुआ। उसे बेचकर वे रातों-रात करोड़पति बन गए। पृथ्वी पर
ऐसे खनिज अब दुर्लभ हो चुके थे।
लेकिन सिद्धार्थ के मन का
चैन खो गया था। उसकी दुनिया उजड़ चुकी थी। जिसके लिए वह
हीरे-जवाहरात लेने गया था—जब वही नहीं रही—तो वह जीकर क्या
करता? वह जैस्मिन से सचमुच बहुत प्रेम करता था। उसने मरने
का विचार किया। साथियों ने उसे बहुत समझाया। उसने भी सोचा
कि वह मर नहीं सकता—मरना कायरता है। वैसे भी मरना कौन
चाहता है? लेकिन वह इस नई दुनिया में भी नहीं रहना चाहता
था, जहाँ उसका प्यार नहीं था।
तब उसने अपने शरीर को जमा कर
यख़ अवस्था में एक लंबी नींद लेने का निश्चय किया। अस्पताल
पहुँचने पर नर्सों और डॉक्टरों ने कारण पूछा। उसने अपनी
पूरी कहानी सच-सच सुना दी। वे हैरान भी हुए और प्रसन्न भी।
उसकी कहानी उन्हें जानी-पहचानी लगी—क्योंकि वह अब एक
दंतकथा बन चुकी थी।
“आपके लिए एक खुशख़बरी है।”
“मेरे लिए यहाँ कौन-सी अच्छी खबर हो सकती है?”
उसने हैरानी से पूछा।
“आपकी पत्नी जैस्मिन यहाँ शीत निद्रा में सो रही है।”
“क्या…?”
उसे विश्वास नहीं हुआ। “क्या मैं सपना देख रहा हूँ?”
उसने अपने नाख़ून से खुद को चुभोते हुए कहा।
“यह सच है। बस यहाँ
हस्ताक्षर कर दीजिए, और हम आपकी पत्नी को जगाने की
प्रक्रिया शुरू कर देंगे।”
उसने खुशी-खुशी हस्ताक्षर कर दिए।
अगले दिन जैस्मिन सौ वर्षों से भी लंबी नींद से जागी।
“आज मैं बहुत खुश हूँ। मुझे यक़ीन था कि तुम एक दिन ज़रूर
वापस आओगे,”
जैस्मिन ने चहकते हुए कहा।
“जब चौदह साल से अधिक समय बीत गया और तुम नहीं लौटे, तो
मैंने इस नई यख़-अवस्था तकनीक को आज़माने का निर्णय लिया
और निर्देश दे दिए कि जैसे ही तुम वापस आओ, मुझे जगा दिया
जाए।”
“ओह, जैस्मिन! मैं बहुत खुश
हूँ। अपनी खुशी बयान नहीं कर सकता। देखो, मैं सचमुच
तुम्हारे लिए चाँद-तारे तोड़ लाया हूँ।”
“मुझे अब उनकी ज़रूरत नहीं है,”
जैस्मिन मुस्कराई,
“मुझे जीवन भर केवल आपका साथ चाहिए।”
यह कहते हुए जैस्मिन ने अपने अंतरिक्ष यात्री पति को इस
तरह गले लगाया, जैसे अब वह उसे फिर कभी अंतरिक्ष में दूर
नहीं जाने देगी।
१ जुलाई
२०२५ |