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जितनी बार तुम्हें देखा है
उतनी बार यही सोचा है

 
 


मौसम जैसा रंग बदलना
फूलों जैसा हंसना खिलना
सीख रहे हैं
साथ अभी तो
धीरे धीरे बढ़ते चलना

 
 



कोई बात हो साथ साथ हो
हाथों में बस यही हाथ हो
धूप छाँव में
नगर गाँव में
चौबारे सा प्यार में ढलना

 
 



ऊँची मंज़िल अगम रास्ते
कितने भी हों कठिन वास्ते
हर उमंग को
नयी जंग को
पतवारों सा मिलकर खेना

 
 



क्या तुमने भी यह देखा है
क्या तुमने भी यह सोचा है
 


 

 

 

       

       

  

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