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उसने पूछा, ''मैडम।''
''मुझे मैडम मत कहो। माँ या माताजी कहकर पुकारो।'' बूढी ने आत्मीयता से उत्तर दिया।
''माताजी आप कितने साल जेल में थी? कौन-कौन से जेल में?''
''एक ही जेल में। अंदमान सेलूलर जेल।''
''किस जुर्म में?''
''सर फर्गुसन म्यूरो मेट्रोपोलिटन कमिश्नर ऑफ पुलिस दिल्ली को गोली मारने के जुर्म में। सुबह से मैं उनका पीछा कर रही थी। उन दिनों कनाट प्लेस में स्पेन्सर्स इंडिया का एक रेस्टोरेंट था। मैंने कमिश्नर को वहाँ जाते देखा। उनके बाहर आने का इंतज़ार किया।''

बूढ़ी मुश्किल से उठ खड़ी हुई। उनके हाथ ही नहीं, शरीर भी काँप रहा था। बीच-बीच में उनका होंठ सिकुड़ जाता था। वह होंठ रगड़कर बात करने लगी। ''मैंने एक गोली चलाई।''
''सर फर्गुसन म्यूरो का घोड़ा बाहर खड़ा था। मैं उस पर चढ़कर निकल गई।''
''आप घुड़सवारी जानती थी?''
''हमारी आज़ाद सेना में सबसे पहले घुड़सवारी सिखाई जाती थी। उन दिनों ब्रिटिश केवलरी फोर्स लाठी चार्ज और बैनेट चार्ज आदि करते थे। इसलिए आज़ाद सेना में घुड़सवारी भी शामिल थी।''
बूढ़ी होंठ को दबाती रही और फिर लेट गई। उसकी हिचकियाँ सुनाई पड़ती थी। मुझे यह देखकर दु:ख हुआ। गौतम बुद्ध मनुष्य के बुढ़ापे से चिंतित थे।

बूढ़ा बात करने लगा। माउंट बैटन मिशन का पहला हुकुम अंदमान के राजनैतिक बंदियों को रिहा करना था। हम दोनों ने जेल से छूटकर एक ही जहाज़ में यात्रा की।
''शायद आप दोनों वहीं मिले और प्यार हुआ।''
''श, श, श, चुप। उन दिनों हमको प्यार करने के लिए समय ही नहीं था। बूढ़े ने बूढ़ी से पूछा कि गाँव जाकर क्या करने का इरादा है। उसने कहा, राजनीति में तो उतरना नहीं चाहती। बच्चों को पढ़ाना चाहती हूँ। बूढ़े ने भी कहा कि राजनीति छोड़ने का इरादा है। उसकी भी इच्छा बच्चों को पढ़ाकर जीने की थी। इस प्रकार ट्यूशन क्लास शुरू कर दिए। उन दिनों दिल्ली में मेरा एक घर था। मैं और मेरा भाई दोनों इस घर के हकदार थे। भाई रंगून में बहुत बड़ा डॉक्टर था। वह कभी वापस नहीं आया। आज भी हम उसी घर में रहते हैं। अभी भी ट्यूशन क्लास चलाते हैं।''
''आप लोगों ने यह नहीं बताया कि आप कहाँ जा रहे हैं?''
''हम भोपाल जा रहे हैं। हमारा एकमात्र बेटा वहाँ रहता है। वहाँ पर एक कंप्यूटर इंस्टीट्यूट चलाता है।''
तभी वहाँ एक महिला बच्चे के साथ आई। वह कुछ अव्यवस्थित थी। शायद वे लोग ग़लत कोच में आ गए थे। औरत के बाल लड़कों की स्टाइल में तरतीब से छोटे काटे हुए थे। वह बनियान जैसे कपड़े से बना टी शर्ट और जीन्स पहने हुई थी। वह आधुनिक दिखाई देती थी। शायद वह कामकाजी महिला भी रही होगी। हो सकता है कि किसी ऊँचे पद पर काम करती हो, क्यों कि उसका चेहरा काफ़ी रुआबदार था और कानों में जगमगाते हुए हीरे थे।
बूढ़ी ने परिचय करवाया। ''यह मेरे बेटे की पत्नी और यह पोता है। वे अब तक बगल के डिब्बे में थे।'' महिला ने होंठ में लाल रंग की लिपस्टिक लगाई थी। संकोच के बिना उसने पूछा, ''यू मस्ट बी फ्राम केरला।''
''हाउ डू यू नो?'' मैंने आश्चर्यचकित हो कर पूछा।
''आय एम वर्किंग इन ए स्कॉटिश एडवरटाइज़िंग कंपनी, ऑफ कोर्स ए मल्टीनेशनल। वेर फ्राम असिस्टेंट मैनेजर टू चपरासी ऑल आर फ्राम केरला।'' उसने होंठ से कुछ हरकत की। इस प्रकार उसने केरल के लोगों के प्रति अपने विचार स्पष्ट कर दिए।
बूढ़ी ने पोते को पास बुलाकर परिचय करवाया। ''यह है मेरा पोता संपूर्णानंद।''
मैंने बच्चे से पूछा, ''बेटा, तुम कहाँ पढ़ते हो?''
''हिंदू वेदिक इंग्लिश मीडियम स्कूल।''
''किस क्लास में?''
''तीसरे क्लास, ''
बूढ़ी की आधुनिक बहू ने हाथों से बच्चे का मुँह बंद किया।
''यू आर स्टडियिंग इन हिंदू वेदिक इंग्लिश मीडियम स्कूल अफिलिएटेड टू ऑक्सफोर्ड। टाल्क इन इंग्लिश मैड यू।''
महिला ने बच्चे के मुँह से हाथ हटाया।
बच्चे ने कहा, ''तीसरे क्लास में।''
औरत के हाथ काँप रहे थे। उसने बच्चे को मारा और धक्का भी दिया। बच्चे के होंठ और माथे से खून निकला और वह दौड़ा तब भी वह चीख रही थी।
''यू इंडियन डेविल टाल्क इन इंग्लिश।''

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16 सितंबर 2006